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नप ने तीन माह में खर्च किए 24 लाख, साफ-सफाई नदारद

बेतिया( नितेश कुमार तिवारी की रिपोर्ट): नगर परिषद विगत एक वर्ष से शहर में आउटसोर्सिंग लागू करने को लेकर धमा-चौकड़ी मची हुई थी। नगर पार्षद लागू नहीं करना चाहते थे। आउट सोर्सिग को लेकर कई तरह के मुंगेरीलाल के सपने दिखाया जा रहा था इसे स्मार्ट सिटी से भी जोड़कर देखा जाने लगा था। शहरी विकास मंत्रालय के अधिकारी भी लागू करवाने को लेकर पहुंचे हुए थे। अथक प्रयासों के बाद हाई वोल्टेज ड्रामा के उपरांत अंतत: लागू करने की हरी झंडी दे दी गई और 03 दिसंबर से कार्यादेश को भी आदेश जारी कर दिया गया। नप ने इसके तहत महंथ स्मृति सेवा संस्थान के नाम पर निविदा कर दी। इसके बाद 88 सफाई कर्मचारी और 31वाहन चालक को बहाल कर लिया गया। सभी कर्मचारीयों को नगर के 39 वार्डों में जरूरत के अनुसार दे दिया गया। आउट सोर्सिग लागू होने से शहर में साफ सफाई की व्यवस्था सु²ढ़ होने की उम्मीद जग गईं। नगर परिषद आउट सोर्सिग पर प्रतिमाह आठ लाख रुपये खर्च करने लगी। लेकिन बेहतर मॉनिट¨रग के अभाव के चलते सफाई व्यवस्था में खास परिवर्तन नहीं हो सका। आगामी 03 जनवरी को शहर में आउट सोर्सिग लागू हुए तीन माह पूरे हो जाएगा। इसके वावजूद शहर का ऐसा एक भी प्रमुख मार्ग नहीं है। जिसमें जगह-जगह पर कचरा का ढेर नहीं लगा हो। स्थिति पहले से और बदतर हो गई है। इसका प्रमाण डंपिग स्थल पर कई दिनों से पड़ा कचरा हकीकत को बयान कर रहा है। कुल मिलाकर नगर परिषद की ओर से तीन माह में 24 लाख रुपये राशि बंदरबाट कर ली गई है। इनसेट

एजेंसी चयन में लगा था, अनियमितता का आरोप

नगर परिषद क्षेत्र में आउट सोर्सिग एजेंसी चयन में अनियमितता बरतने का आरोप लगाया गया था। यह आरोप कामगार यूनियन के सचिव विनय बागी और स्थाई समिति के सदस्य संजय ¨सह उर्फ छोटे ¨सह ने लगाई है। इसके आलोक में जिलाधिकारी डा. निलेश रामचंद्र देवरे ने जांच रिपोर्ट की तलब की थी। आरोप है कि कार्यपालक पदाधिकारी मनोज कुमार पवन व उप सभापति कयूम अंसारी ने मिलीभगत से अपने चहेते एजेंसी के साथ अनुबंध किया गया। फिलहाल जांच अभी अधर में लटका हुआ है।

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