पश्चिम चंपारण

*रोहित शर्मा के लापता का मामला हत्या में तब्दील*

न्यूज9 टाइम्स बेतिया से आशुतोष कुमार बरनवाल की ब्यूरो रिपोर्ट :-


पश्चिम चम्पारण बेतिया की ह्रदयीस्थली स्थित लाल बाजार वार्ड नम्बर 20 के स्थायी निवासी गोपाल शर्मा के एकलौते पुत्र जिसकी उम्र मात्र 20 वर्ष थी 23 सितम्बर की रात्रि 9 बजे किसी काम से घर से निकला परन्तु उसके बाद वह फिर आज तक घर नहीं पहुंचा। रोहित शर्मा के बूढ़े पिता जो शारीरिक और आर्थिक दोनों से ही अत्यंत कमजोर और गरीब हैं के द्वारा पुत्र की काफी खोज बीन की गई परन्तु सिर्फ निराशा ही हाथ लगी और तब थक हार कर वे नगर थाना बेतिया के शरण में अपने बेटे के गुमशुदगी का मामला लेकर गुमशुदगी के तीन दिन पश्चात् 26 सितम्बर को लिखित आवेदन देकर नगर थानाध्यक्ष से बरामदगी की गुहार लगाया। आवेदन में उपरोक्त बातें वर्णित करते हुए गुमशुदा रोहित शर्मा की दो मोबाइल नम्बर 9576527339 व 8084919485 रोहित के पास होने का जिक्र किया। परन्तु बेतिया नगर पुलिस ने मामले का संज्ञान आवेदन मिलने के तीन दिन बाद यानि 29 सितम्बर को 715/19 प्राथमिकी दर्ज की और अनुसंधान धीमी गति से शुरू की। चूँकि रोहित एक नौजवान लड़का था जिसके कारण अन्य कांडों के भांति पुलिस प्रेम प्रसंग में भागने या फिर कहीं बिना कहे चले जाने का मामला समझ कर अनुसंधान को ठंडे बस्ते में रखते हुए अपनी कार्यवाही कर रही थी।
प्राथमिकी दर्ज होने के एक माह पश्चात भी पुलिस जब कोई ठोस कार्यवाही नहीं कर पाई तब न्यूज9 टाइम्स ने इस मामले को पूरे जोर शोर से अपने समाचार में उठाया और बेतिया पुलिस को कार्यवाही के लिए लिखा। तब भी अनुसंधानकर्ता पदाधिकारी द्वारा कछुए के चाल से गोपाल शर्मा जी व उनकी पत्नी का गवाही वगैरह लिया। परन्तु अभी भी पुलिस इस गुमशुदगी को गंभीरता से नहीं ले पा रही थी और ना ही सोच पा रही थी कि यह घटना निकट भविष्य में एक बड़ी घटना का रूप ले लेगी और शायद इसकी कीमत सिर्फ व सिर्फ गुमशुदा रोहित शर्मा के निर्धन और बुजुर्ग माता पिता को चुकानी पड़ेगी।
और हुआ भी यही। पुलिस ने जब प्राथमिकी आवेदन पर दिए गए रोहित शर्मा के मोबाइल फोन नम्बर की डिटेल्स निकाली तो उन नम्बरों पर आए घटना के दिन आए नम्बरों के डिटेल्स पर छापामारी की तो सारा राज परत दर परत हैरत अंगेज के साथ खुल गए और गुमशुदा रोहित शर्मा की हत्या होने की संलिप्तता खुली। अनुसंधान में सारा माजरा दीपाली राज नाम की लड़की से शुरू होती है और उसके दो भाइयों के अलावे तीन अन्य लड़कों के साथ खत्म होती है। सूत्रों की मानें तो दीपाली राज का प्रेम प्रसंग कई लोगों से था जिसका एक मात्र गवाह रोहित शर्मा था जिसके पास दीपाली राज के कुछ विडियो और फोटोग्राफ रोहित के मोबाइल फोन में थी और शायद यहीं वजह बनी रोहित की हत्या की।
23 सितम्बर की रात्रि को दीपाली राज का भाई (1)अभिषेक अग्रवाल (2)सौरभ अग्रवाल दोनों पिता राज कुमार अग्रवाल सा. क्रिश्चियन क्वार्टर थाना बेतिया नगर (काली बाग ओपी) बेतिया, अभिषेक का दोस्त (3) प्रिंस उर्फ सिध्दांत पिता मधुरेन्द्र कुमार वर्मा थाना बगहा (4) सौरभ श्रीवास्तव पिता स्व. उपेन्द्र प्रसाद श्रीवास्तव सा. सिकरौल थाना चौतरवा (5) सिट्टू उर्फ इमरान सा.+थाना काली बाग ने मोबाइल पर फोन कर अपने पास बुलाया। ये सभी मिलकर ही गुमशुदा रोहित शर्मा की हत्या में संलिप्त पाए गए।
जब नगर थानाध्यक्ष सह पुलिस निरीक्षक के द्वारा जब उपरोक्त अभियुक्तों को गिरफ्तार करने हेतु छापेमारी की गई तो शामिल अभियुक्त (1) सौरभ अग्रवाल (2) सिद्धांत उर्फ प्रिंस (3) सौरभ कुमार श्रीवास्तव को गिरफ्तार की गई तब इन्होंने पूरे घटनाक्रम का पटाक्षेप कर दिया। बकौल गिरफ्तार अभियुक्तों ने बताया कि एक सफेद स्विफ्ट डिजायर कार जिसका नम्बर BR22 AJ6298 से दीपाली राज के दोनों भाई और उपरोक्त अन्य अभियुक्तों के अलावे गुमशुदा रोहित शर्मा बगहा स्थित प्रिंस के घर पहुंच कर खाना खाया और उसके पश्चात बेतिया वापसी के दरम्यान रोहित की हत्या कर दी और आगे वाली सीट पर बैठाकर सिरिसिया थानांतर्गत मिश्रौली पेट्रोल पम्प के 100 मीटर आगे कार को सड़क किनारे गड्ढे वाले पानी में धकेल दिया और कार दुर्घटना का पृष्ठभूमि तैयार करते हुए रोहित शर्मा को स्थानीय ग्रामीणों के मदद से कार से निकाला और बेतिया इलाज के लिए ऐम्बुलेंस से बेतिया के लिए चल दिया परन्तु ऐम्बुलेंस को बेतिया अस्पताल ना ले जाकर शव को गायब करने के उद्देश्य से कठैया पुल थाना जगदीशपुर ओपी में पुल से नीचे गहरे पानी में शव को फेंक दिया। चूंकि उस समय सभी नदियों में बाढ़ की स्थिति जैसी आई थी जिस कारण शव की बरामदगी नहीं हो पाई थी। घटना के तीन अभियुक्त (1) सौरभ अग्रवाल (2) सिद्धांत उर्फ प्रिंस (3) सौरभ श्रीवास्तव की गिरफ्तारी हो गई है परन्तु (1) अभिषेक अग्रवाल और (2) इमरान उर्फ सिट्टू की गिरफ्तारी हेतु बेतिया पुलिस द्वारा छापेमारी की जा रही है।
घटना के लगभग ढाई माह बाद कांड का उद्भेदन अवश्य हुआ पर इसमें यदि बेतिया पुलिस ने गंभीरता से लेते हुए जिन मोबाइल फोन के डिटेल्स के जरिए अभियुक्तों तक पहुंची है वो प्राथमिकी के महज कुछ दिनों में ही पहुंच जाती तब शायद मृतक रोहित शर्मा की गुमशुदगी और हत्या का मामला का पटाक्षेप भी हो जाता और उसके वियोग में तड़प रहे गोपाल शर्मा और उनकी पत्नी को शायद रोहित शर्मा की शव भी नसीब हो जाती। हत्यारों ने तो बस एक हत्या रोहित शर्मा कि की है परन्तु उसके पीछे दो अन्य बूढ़े माता पिता के बुढ़ापे की भी हत्या की है। उन्होंने हत्या की है एक बूढ़े मां बाप के जीवन जीने की आस की।
बहरहाल पुलिस किस तरह दोषियों को न्यायालय में पेश कर सजा दिलाती है और बूढ़े दम्पतियों को न्याय देती है जिसका एकमात्र सहारा अब इस दुनिया में नहीं रहा। रोहित शर्मा के पिता गोपाल शर्मा हमेशा से अपने गरीब होने का कारण बताकर पुलिस द्वारा तीव्र कार्यवाही नहीं करने का आरोप लगाते आएं है और शायद यह प्राथमिकी दर्ज होने से लेकर उद्भेदन तक के क्रियाकलापों से स्पष्ट भी नजर आता है। शायद गोपाल शर्मा की व्यथा पर पुलिस तरस खा गई होती तो गुमशुदा रोहित मृत रोहित ना बनता। रोहित शर्मा के पिता अब बेतिया पुलिस से विनती कर रहे हैं कि उनके पुत्र की शव बरामदगी की जाए ताकि वो उसका अंतिम संस्कार कर सकें जो कि शायद रोहित को नसीब ना हो सका है और ना हो सकने की डर है।

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