मुजफ्फरपुर

बी.आर.ए. बिहार विश्वविद्यालय, मुजफ्फरपुर में *’रचनाकर से संवाद’* कार्यक्रम

बी.आर.ए. बिहार विश्वविद्यालय, मुजफ्फरपुर में *’रचनाकर से संवाद’* कार्यक्रम

*न्यूज़ 9 टाईम्स मुजफ्फरपुर से प्रभात रंजन की रिपोर्ट:———————*

आज दिनांक 24.05.2022 को विश्वविद्यालय हिंदी विभाग, बी.आर.ए. बिहार विश्वविद्यालय, मुजफ्फरपुर में *’रचनाकर से संवाद’* कार्यक्रम-शृंखला-अंतर्गत समकालीन हिंदी कथा साहित्य की महत्त्वपूर्ण हस्ताक्षर एवं प्रखर पत्रकार  गीताश्री का एकल व्याख्यान आयोजित हुआ।

गीताश्री स्त्री-विमर्श की मुखर आवाज हैं। ज्ञात हो कि ये बी.आर.ए. बिहार विश्वविद्यालय, मुज़फ्फरपुर के स्नातकोत्तर हिंदी विभाग की पूर्व छात्रा रही हैं। विभाग के विद्यार्थियों से संवाद करते हुए उन्होंने कहा कि ‘विद्रोही प्रवृत्ति की होने के कारण मैं साहित्य की विद्यार्थी बनी और मेरी रचनाएँ समाज के शोषक और शोषितों से संवाद करती रहती है ताकि समाज की विकृत प्रवृत्तियों का परिष्कार संभव हो सके।

स्त्री रचना को समझने के लिए स्त्री दृष्टि आवश्यक है।’ साथ ही उन्होंने कहा कि सिर्फ भोगे हुए यथार्थ को ही नहीं बल्कि अपने आपको स्त्री समाज की प्रतिनिधि मानने के कारण मैं यथार्थवादी स्त्री-केंद्रित कथाएँ लिखती हूँ। ‘मैं जिंदगी की चाक पर अपना कुम्हार खुद बनना चाहती हूँ’ ध्येय वाक्य ही मेरी रचनाओं का केंद्रीय तत्व रहा है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता एवं संचालन विश्वविद्यालय हिंदी विभाग के अध्यक्ष प्रो. सतीश कुमार राय ने किया। उन्होंने गीताश्री का परिचय देते हुए कहा कि अपने विभाग की पूर्व छात्रा को साहित्याकाश में चमकते हुए देखना एक सुखद अनुभव है।

इस अवसर पर डॉ. वीरेंद्रनाथ मिश्र, डॉ. कल्याण कुमार झा, डॉ. राकेश रंजन, डॉ. सुशांत कुमार, डॉ. उज्ज्वल आलोक, डॉ. संध्या पाण्डेय, डॉ. पुष्पेंद्र कुमार, सुश्री सोनल, श्री मनोज मोहन, श्री अशोक गुप्त, श्री अनिल चौधरी सहित विभाग के सौ से अधिक विद्यार्थी व शोधार्थी उपस्थित रहे।#news9times

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