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क्या है बेतिया नगर स्थित पिंजरा पोल गौशाला का सच, गौ सेवा के नाम पर क्यों मचा है लूट

क्या है बेतिया नगर स्थित पिंजरा पोल गौशाला का सच, गौ सेवा के नाम पर क्यों मचा है लूट

न्यूज 9 : बेतिया से मनीष कुमार की रिपोर्ट :-

बेतिया नगर स्थित पिंजरा पोल गौशाला ने लम्बे समय से अपने स्थापना के उद्देश्य को बदल दिया है। हालांकी ये बात बहुत पुरानी है परंतु इसका पता तब चला जब बीते समय गोपालपुर थाना ने 15 गौवंशो को कत्लखाने मे जाने से बचाया और उन गौवंशो को पिंजरा पोल गौशाला मे रखने को कहा तो सचिव सिंघाणिया जी ने साफ मना कर दिया उन्होने बताया की उनके पास संसाधनो की कमी है। जब मैंने उस गौशाला का भ्रमण किया तो पाया की संसाधन नही गौ सेवा भावना की कमी है कुछ लोगो ने गौशाला को व्यवसायिक स्वरूप दे दिया है।

वहाँ बूढ़ी अनाथ और बेसहारा गौवंशो की सेवा के बदले दूध देने वाली गायों की सेवा होती है।भरपूर संसाधन होने के बाबजूद उसका प्रयोग नही किया जाता है। नाम ना छापने की शर्त पर 1 सेवक ने बताया की आम जनो को इस गौशाला से दूर रखा जाता है और इसी प्रयोजन के तहत 1 रुपया पर सदस्यता शुल्क की जगह 5100 रुपया कर दिया गया। एक बाहरी ब्यक्ति ने तो ये भी कहा की ज्यादातर सद्स्य 1 ही जाति से आते है इसिलिए इसके संचालन मे व्यवसायिकता है। जबकी जानकारों के विचार से इस गौशाला की स्थापना के समय इसका उद्देशय सिर्फ और सिर्फ गौ सेवा है ना कि सिर्फ पैसा कमाना या दुध बेचना। गौशाला भ्रमण के बीच ही BHP के रमण जी से मुलाकात हुई इन्होंने भी गौशाला की अव्यवस्था पर सवाल उठाये।उन्होने बताया की वो लम्बे समय से इसपर काम कर रहे है और वे अपनी एक संस्था GAU SAMRIDHI DHAAM चला रहे है जहाँ एक भी दूध देने वाली गाय नहीं रखते और पुलिस जो भी गाये कत्लखानों मे जाने से बचाती है उनको वो आश्रय देते है। परंतु उन्होने खेद जताया की सरकार पूरी सहायता दूध का व्यवसाय करने वाली संस्था को देती है ना की जो सच मे गौसेवा करता है। पिंजरा पोल के व्यवस्थापकों से उन्होने निवेदन किया की गौवंशो की सेवा का सत्य और मार्मिक स्वरूप समझे और उसी के अनुसार काम करे।आज गौशाला भ्रमण के बाद अन्दाजा लगा की स्व. मोटाणी जी ने जिस उद्देश्य से गौशाला को भूमि दान की और उनके आजीवन भरण पोषण के उद्देश्य से 32 एकड़ भूमि दी उनका प्रयोजन गलत साबित हो गया है। साथ ही सरकार का अनुदान इस गौशाला को मिलना भी कहीं ना कहीं इस बात को भी दर्शाता है अफसर सिर्फ चाटुकारिता की भाषा समझते है वो कभी भी वास्तविकता को नही मानते। हिन्दू जागरण मंच के जिला मंत्री ने तो यहां तक कह दिया की चूँकि यह गौशाला एक गौसेवा का माध्यम ना होकर कुछ लोगो की व्यवसायिक और निजी भरण-पोषण का साधन हो गया है।
पिंजरा पोल गौशाला में सचिव रिश्तेदारों और सदस्यों की निजी गाड़ियों को पार्किंग स्टैंड के रूप में इस्तेमाल भी किया जाता है। जो इस कमेटी के कार्यकारिणी सदस्य है वो इसके मालिकाना हक रखते हैं या केवल इसके देख रेख करने के लिए है कमेटी के कार्यकारिणी के सदस्यों का लगभग 25 वर्षों से अपने पद पर बने रहना और किसी अन्य का सदस्यता ना देना उसमें व्याप्त भ्रष्टाचार को भी दर्शाता है।
अब सवाल यह उठता है कि क्या पिंजरा पौल गौशाला बेतिया निजी सम्पत्ति है या सरकारी सार्वजनिक

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